केंट आरओ का टर्नओवर 2017-18 में 950 करोड़ अपेक्षित था. इस साल उसे उम्मीद है कि वह 1000 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी.
आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है. केंट आरओ सिस्टम्स की सफलता के
पीछे यही दर्शन रहा है. इसके फाउंडर महेश गुप्ता को 1998 में अपने दोनों
बच्चों के बीमार पड़ने के बाद बड़ा झटका लगा. उन्हें वाटर प्यूरीफायर की
जरूरत महसूस हुई. लेकिन उपलब्ध प्यूरीफायर की गुणवत्ता से संतुष्ट
नहीं होने के कारण बाध्य होकर उन्हें केंट आरओ शुरू करना पड़ा. पेशे से
इंजीनियर गुप्ता के लिए शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल था, लेकिन धुन के
पक्के गुप्ता ने थोड़े ही दिनों में इसे सफल कर दिखाया.
कानपुर आईआईटी से स्नातक गुप्ता का मानना था कि उस समय जितने प्यूरीफायर
थे, उनमें से अधिकांश यूवी यानी अल्ट्रावायलेट टेक्नोलॉजी पर आधारित थे.
लेकिन पानी में घुली हुई गंदगी को वे कवर नहीं कर पाते थे. ऐसे में
उन्होंने आरओ यानी रिवर्स ऑस्मोसिस की शुरुआत की.
गुप्ता इस बात से वाकिफ थे कि भारत में 80 फीसदी बीमारियां पानी के कारण
ही होती हैं. अफसोस कि शहरों में रहने वाले 80 फीसदी परिवार टेप वाटर को भी
प्यूरीफाई नहीं करते हैं. ऐसे में इस मार्केट की संभावनाओं की उन्हें
जल्द थाह लग गई.
आरओ बिजनेस की शुरुआत गुप्ता ने महज 5 लाख रुपए से की. यह रकम उन्होंने
अपनी वेंचर एसएस इंजीरियरिंग से होने वाली बचत से निकाली थी. इससे पहले
गुप्ता ने 11 साल तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के साथ डिप्टी मैनेजर के रूप
में काम किया. 1988 में उन्होंने नौकरी छोड़कर ऑयल मीटर बनाने का बिजनेस
शुरू किया. उस समय उनकी कंपनी में मात्र 10 से 15 कर्मचारी थे.
केंट आरओ की स्थापना के समय उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं होने के कारण यह
काम उन्होंने छोटे से गैराज से शुरू किया. पहले एक साल में मात्र 100
प्यूरीफायर ही बिके थे. उस समय इसकी कीमत 20 हजार रुपए थी, जबकि अन्य
प्यूरीफायर की कीमत 5 हजार रुपए के करीब थी.
केंट आरओ का टर्नओवर 2016-17 में 850 करोड़ रुपए था. 2017-18 में कंपनी का
लक्ष्य 950 करोड़ रुपए है और इसके अगले साल उसे उम्मीद है कि वह 1000
करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी. उनकी कंपनी में 2500 से अधिक लोग काम
करते हैं.
गैराज से शुरू किया था Kent RO, आज है 1000 करोड़ की कंपनी
Reviewed by J.P. BABBU
on
April 02, 2018
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