कांग्रेस के भारत बंद की बनारस में खुली पोल, इन ग्रामीण महिलाओं ने कैमरे के सामने उगला सच
बनारस।
देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस की ओर से सोमवार को ‘भारत बंद’ का
आह्वान किया गया था। इस दौरान कई स्थानों पर हिंसा और झड़पें हुई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी कांग्रेस के
बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। वहीं अब एक वीडियो सामने आया है जिसे
देखने के बाद बंद के दौरान वाराणसी में किये गये अनोखे प्रदर्शन पर सवाल
उठने लगे हैं।
दरअसल…
सोमवार को कांग्रेस नेत्री श्वेता राय के नेतृत्व में एक बैलगाड़ी मार्च निकाला गया। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत और रसोई गैस के दामों के विरोध में कांग्रेस नेत्री ने बैलगाड़ी पर बैठकर उज्जवला योजना में मिले सिलेंडर को लौटाने और चूल्हे व गोहरी पर भोजन बनने का अनोखा प्रदर्शन कर के पार्टी में अपनी धाक जमा दी थी।
मगर…
सामने आये वीडियो में कांग्रेस नेत्री श्वेता राय के साथ चल रही महिलाओं से जब पूछा गया कि जिन सिलेंडरों को वो वापस करने जा रही हैं, क्या वो उनके अपने हैं, तो महिलाओं ने साफ इनकार कर दिया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें तो उज्जवला योजना में सिलेंडर मिला ही नहीं है।
ऐसे में…
सवाल उठता है कि आखिर जब इन महिलाओं को गैस सिलेंडर मिला ही नहीं, तो वे लोग वापस कौन का और किसका सिलेंडर करने जा रहीं थीं। मोदी सरकार के विरोध के लिये आयोजित इस अनोखे किस्म के कार्यक्रम में फोटो खिंचाने के लिये ग्रामीण महिलाओं की भीड़ तो जुटा ली गयी थी लेकिन शायद उन्हें कायदे से ट्रेनिंग देना आयोजक भूल गये। इससे उनके सिलेंडर वापसी कार्यक्रम की पोल मीडिया के सामने खुलते देर नहीं लगी।
हालांकि…
सवाल मोदी सरकार से भी बनता है, कि अखिर जब उज्जवला योजना की कामयाबी का ढोल इतनी तेजी के साथ पीटा जा रहा हो, तब भी ये ग्रामीण महिलाएं इसका लाभ लेने से कैसे वंचित रह गयीं। वो भी खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में।
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दरअसल…
सोमवार को कांग्रेस नेत्री श्वेता राय के नेतृत्व में एक बैलगाड़ी मार्च निकाला गया। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत और रसोई गैस के दामों के विरोध में कांग्रेस नेत्री ने बैलगाड़ी पर बैठकर उज्जवला योजना में मिले सिलेंडर को लौटाने और चूल्हे व गोहरी पर भोजन बनने का अनोखा प्रदर्शन कर के पार्टी में अपनी धाक जमा दी थी।
मगर…
सामने आये वीडियो में कांग्रेस नेत्री श्वेता राय के साथ चल रही महिलाओं से जब पूछा गया कि जिन सिलेंडरों को वो वापस करने जा रही हैं, क्या वो उनके अपने हैं, तो महिलाओं ने साफ इनकार कर दिया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें तो उज्जवला योजना में सिलेंडर मिला ही नहीं है।
ऐसे में…
सवाल उठता है कि आखिर जब इन महिलाओं को गैस सिलेंडर मिला ही नहीं, तो वे लोग वापस कौन का और किसका सिलेंडर करने जा रहीं थीं। मोदी सरकार के विरोध के लिये आयोजित इस अनोखे किस्म के कार्यक्रम में फोटो खिंचाने के लिये ग्रामीण महिलाओं की भीड़ तो जुटा ली गयी थी लेकिन शायद उन्हें कायदे से ट्रेनिंग देना आयोजक भूल गये। इससे उनके सिलेंडर वापसी कार्यक्रम की पोल मीडिया के सामने खुलते देर नहीं लगी।
हालांकि…
सवाल मोदी सरकार से भी बनता है, कि अखिर जब उज्जवला योजना की कामयाबी का ढोल इतनी तेजी के साथ पीटा जा रहा हो, तब भी ये ग्रामीण महिलाएं इसका लाभ लेने से कैसे वंचित रह गयीं। वो भी खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में।
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